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Dr. Shakuntla Kalra शक
Dr. Shakuntla Kalra
साहित्यकार एवं शिक्षाविद्
75 कृतियाँ 45+ पुरस्कार
◈ साहित्यिक संग्रह — हिन्दी साहित्य ◈

दो शब्द · डॉ. शकुन्तला कालरा

भूमिका: नई साइकिल (बाल केन्द्रित बालकहानियाँ)

दो शब्द

बच्चों मैं जानती हूँ आपको कहानी सुनना, कहानी पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। इस बार मैं आपके लिए बालकों पर केन्द्रित कुछ कहानियाँ लेकर आई हूँ। बालक चाहे अमीर हो, चाहे गरीब, चाहे वह बड़ी-बड़ी कोठियों में रहने वाला हो, चाहे झोपड़ी में। लेकिन हर बालक का मनोविज्ञान कुछ अंशों में एक सा होता है। हर बालक अपने मूल रूप में संवेदनशील होता है। अपने संगी-साथियों के प्रति उसके मन में प्रेम होता है और पशु-पक्षियों के प्रति भी वह संवेदनशील होता है। संग्रह की सभी कहानियों में आपको इसी मनोविज्ञान पर केन्द्रित बालक मिलेंगे। मेरा विश्वास है कि ये

कहानियाँ आपका मनोरंजन करेंगी और आपको वैसा ही बनने की प्रेरणा भी देंगी। कहानियों का उद्देश्य;

भले ही सिर्फ मनोरंजन है लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से उनमें गूँथा हुआ संदेश बच्चों को राह दिखाएगा। मेरा यह प्रयास रहा है कि कहानियों में कहीं सीधे आदेश या उपदेश न हो बल्कि आप स्वयं कहानी के पात्रों के चरित्र से, उनके आचार-व्यवहार से एक संदेश और प्रेरणा ग्रहण करें जो आपके जीवन का आलोक-स्तंभ बन जाए।

डॉ. शकुंतला कालरा,
(सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, मैत्रेयी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय)
संपर्क: एन.डी.-57, पीतमपुरा दिल्ली-110034 मो. 8287479455, 9958455392 लैंड लाइन: 01127318835
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