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Dr. Shakuntla Kalra शक
Dr. Shakuntla Kalra
साहित्यकार एवं शिक्षाविद्
75 कृतियाँ 45+ पुरस्कार
◈ साहित्यिक संग्रह — हिन्दी साहित्य ◈

भूमिका · बाल-कविताएँ

भूमिका: करे तमाशा प्यारी मुनिया

बाल-कविताएँ : बचपन की गुनगुनाहट

आज बाल-कविताएँ बड़ी संख्या में लिखी जा रही हैं । उनमें ये अच्छी बाल-कविताएँ बहुत कम होती हैं ।

अच्छी कविता की कुछ शर्तें हैं:

उनमें बच्चों की दुनिया हो, उनके खेल-कूद, रूठना-मनाना, शैतानी, सहज प्रश्न, उनकी इच्छाएँ, ज़िद और ऐसा ही बहुत कुछ ।

उनमें घिसे-पिटे विषय न हों, बल्कि नए विषय उठाए गए हों जो बदलते समय के अनुसार हों ।

अगर पुराने विषय को लिया जाए, तो उनकी प्रस्तुति नए ढंग की हो ।

बाल-कविताएँ छंदबद्ध हों, उनमें लयात्मकता एवं गेयता हो ।

मैं कहना चाहता हूँ कि शकुंतला जी की बाल-कविताएँ ऐसी ही हैं यानी ये बढ़िया कविताएँ हैं । अवश्य ही बच्चे इनमें नयापन पाएंगे और इन्हें एक बार पढ़कर बार-बार गुनगुनाएंगे । ये कविताएँ उनके दिल से उपजी हैं, इसलिए दिलचस्प हैं । मैं इतनी अच्छी बाल-कविताओं के लिए शकुंतला जी को बधाई देता हूँ । मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे बाल-पाठक और बाल-साहित्य के सुधी समीक्षक इन्हें पसंद करेंगे और बाल-साहित्य-जगत में इनका स्वागत होगा ।

डॉ. रत्नलाल शर्मा
एस-जी 2, जेवियर अपार्टमेंट्स, पीतमपुरा, दिल्ली-110034

अपनी ओर से

मनुष्य ने पहली कविता कब लिखी? इसका उत्तर विवादस्पद हो सकता है । हाँ, कविता की उत्पत्ति कैसे हुई होगी, इसका उत्तर सहज है । अवश्य ही प्रथम बाल-कविता माता और बच्चे के संवाद में, दादा-दादी और नाना-नानी के प्यार-दुलार में ही प्रस्फुटित हुई होगी । अनेक जिज्ञासाओं और प्रश्नों को मन में लिए अपनी अस्पष्ट कल्पना को जब अपने सर्वाधिक निकट साथी के सम्मुख रखा होगा और खेल-खेल में बहलाने और तसल्ली देने का प्रयास किया होगा, वहीं से बाल-कविता फूटी होगी । ऐसी ही स्थितियों में बालक अपना अंतरजगत सहज तुकबंदी में खोल देता है, वहीं से बाल-कविता का उदय हो जाता है ।

मुझे ऐसा लगता है, मेरे भीतर आज भी बचपन अठखेलियाँ कर रहा है । भीतर बैठा कोई बच्चा मुझे लुभा रहा है और गुनगुना रहा है । उसी ने ये कविताएँ मुझसे लिखवा ली हैं । वैसे वही क्यों, मेरे सामने तुम सब भी रहे हो । अब ये तुम्हारी कविताएँ तुम्हारे लिए हैं, तुम्हारे सामने है । तो प्यारे बच्चों, ये कविताएँ तुम्हारा भरपूर मनोरंजन करेंगी । फिर भी तुम्हें ये कविताएँ कैसी लगीं, मुझे बताना जरूर ।


डॉ. शकुंतला कालरा, डी.लिट.
(सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, मैत्री कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय)
संपर्क: एन.डी-57, पीतमपुरा दिल्ली-110034 मो.: 8287479455 लैंडलाइन: 011-41677475

— ये कविताएँ बच्चों के मन को छूने का सरल प्रयास हैं ।

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