भूमिका: हिंदी बालसाहित्य - मील के पत्थर
हिंदी बालसाहित्य के अनन्य साधक की अगली कड़ी है हिंदी बालसाहित्य के शलाका व्यक्तित्व, जिसने बालसाहित्य के उन दिग्गज साहित्यकारों के रचनात्मक योगदान के किसी एक विशिष्ट पक्ष को उद्घाटित किया है। ये हमारे बालसाहित्य के वे मील के पत्थर हैं जिन पर बालसाहित्य का सुंदर भवन खड़ा है। इन साहित्यकारों पर कार्य करते हुए, इनमें से कुछ समकालीन बालसाहित्यकारों के साथ कई आत्मीय मुलाकातें भी हुई थीं, इसीलिए इन आलेखों में आपको संस्मरण-विधा के भी गुण मिलेंगे। कहीं उनसे लिए गए साक्षात्कारों में उनकी बात उन्हीं की जुबानी होगी, जो उनके लिए अंतःसाक्ष्य से जुड़ा एक प्रामाणिक दस्तावेज़ होगा। इसमें सुभद्रा कुमारी चौहान, रामधारी सिंह दिनकर, कन्हैयालाल 'मत्त', दामोदर अग्रवाल, निरंकारदेव सेवक, डॉ. श्रीप्रसाद, शांति अग्रवाल, डॉ. जयप्रकाश भारती, डॉ. रत्नलाल शर्मा, राष्ट्रबंधु, कृष्ण शलभ, योगेंद्र कुमार 'लल्ला', मनोहर वर्मा आदि के आलेख हैं।
हमारे ख्यातिनाम बालसाहित्यकारों ने अपने बहुआयामी सृजन के द्वारा बालसाहित्य की अनन्य सेवा की है। ऐसे अनन्य साधकों के योगदान के लिए बालसाहित्य और उसके सहृदय पाठक सदा ऋणी रहेंगे। बालसाहित्य के ऐसे आधिकारिक चर्चित हस्ताक्षरों की साहित्यिक संपदा सदा हमारे साथ रहेगी और उन्हें अमरता प्रदान करेगी। बालसाहित्य के पुरोधा, जिन्होंने बच्चों को अनेक प्रेरक रचनाएं दीं, का योगदान अकथ्य और अवर्णनीय है। विविध विधाओं में अपने मौलिक सृजन और आलोचना के धरातल पर बालसाहित्य को ऊंचाइयां दीं, वे बेजोड़ हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों बालसाहित्य-उन्नयन को समर्पित रहे। समय-समय पर विशिष्ट एवं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के अनुरोध पर ऐसे जिन बालसाहित्यकारों और उनके योगदान को आलेख के माध्यम से उद्भाषित करने का विनम्र प्रयास किया, वे सभी भी इस पुस्तक में संकलित हैं।
बालसाहित्य के मार्गदर्शक एवं ज्योति-स्तंभ इन प्रतिष्ठित रचनाकारों ने बालसाहित्य के विकास के लिए जो कार्य किया उसकी कोई मिसाल नहीं। बालसाहित्य की समृद्धि और उसके उन्नयन में यद्यपि उनका योगदान बहुत बड़ा और बहुमुखी है, किंतु इन आलेखों में उनके किसी विशिष्ट पहलू मात्र का कुछ पृष्ठों की सीमा में ही आकलन हो पाया है। इन सभी साहित्यकारों का योगदान विस्तृत शोधपरक मूल्यांकन की अपेक्षा रखता है। इनके प्रदेशीय आकलन की आवश्यकता एवं उपयोगिता को मैं अनिवार्य कार्य मानती हूं और ऐसा विश्वास करती हूं कि जिन्होंने हमें कुछ दिया है, उनके योगदान को उजागर करना हमारा दायित्व है। कुछ कार्य हम करें, कुछ भावी पीढ़ी संभाले।
प्रस्तुत पुस्तक में कुल ----- आलेख हैं। प्रस्तुत पुस्तक के आलेखों में 'बालसाहित्य की शलाका हस्तियों' की साहित्य साधना को कुछ अंशों तक उद्भाषित करने का मैंने प्रयास किया है। उनके रचनात्मक सहयोग ने हिंदी बालसाहित्य को नई भंगिमा दी है। उनके कालजयी प्रदेशीय को प्रकाश में लाने का मेरा यह प्रयास कितना सार्थक हो पाया है, इसका निर्णय सुधी पाठक ही करेंगे। पुस्तक में दिए गए प्रतिष्ठित रचनाकारों का कार्य यद्यपि बेमिसाल है। बालसाहित्य की समृद्धि और उसके उन्नयन में उनका योगदान बहुत बड़ा और बहुमुखी है, किंतु पुस्तक के इन आलेखों में उनके किसी विशिष्ट पहलू का मात्र कुछ पृष्ठों में ही आकलन हो पाया है। इन सभी साहित्यकारों का योगदान विस्तृत शोधपरक मूल्यांकन की अपेक्षा रखता है। इनके प्रदेशीय आकलन की आवश्यकता एवं उपयोगिता को मैं अनिवार्य कार्य मानती हूं और ऐसा विश्वास करती हूं कि जिन्होंने हमें कुछ दिया है उनके योगदान को उजागर करना हमारा दायित्व है। कुछ कार्य हम करें, कुछ भावी पीढ़ी संभाले।
हमारे वरिष्ठ बालसाहित्यकार जो दिवंगत हो चुके हैं, वे पार्थिव रूप में भले ही हमारे बीच नहीं हैं, किंतु अपनी रचनाओं के रूप में सदा हमारे साथ रहेंगे। बाल साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान भविष्य की निधि के रूप में सुरक्षित रहेगा। इस पुस्तक में उन बालसाहित्यकारों के व्यक्तित्व-कृतित्व की कुछ छवियां हैं। बाल साहित्य से जुड़े ऐसे विचार-बिंदु हैं जो बालसाहित्यनुरागियों एवं बालसाहित्य के अध्येताओं के साथ-साथ शोधार्थियों और अनुसंधानकर्ताओं के लिए अत्यंत लाभप्रद होंगे और भावी इतिहास-लेखकों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
संस्मरण विधा की शैली से परिचित कराने का श्रेय मनु जी को है।
— यह पृष्ठ भूमिका के रूप में बालसाहित्य के अनन्य साधकों को समर्पित है।